Unseen Facts about Kamakhya Temple (कामाख्या मंदिर के रहस्य)

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kamakhya temple
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भारत में, अलग-अलग मंदिरों में अलग अलग मिथक होते हैं या आप कह सकते है की अलग-अलग रहस्य होते है जिन्हे मै आपको बताने की कोशिस करूँगा। तो मैंने आपको भारतीय मंदिरों के इन सभी पौराणिक अतीत के बारे में बताने का फैसला किया।

तो, दोस्तों, मैं संपूर्ण ग्रह की माँ “माता सती” से शुरू करूँगा। उनके पूरे देश में 51 शक्ति पीठ हैं।

जिसमें मैं सबसे पहले कामाख्या मंदिर लूँगा।

कामाख्या मंदिर:

यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक है I यह माता सती के शरीर का एक हिस्सा है। यह महामुद्रा (योनि) है, मिथक के अनुसार, इस मंदिर में माता हर महीने के तीन दिनों के लिए रजस्वला की स्थिति में आती है और इन तीन दिनों में यह मंदिर बंद हो जाता हैं और अम्बूवाची योग पर्व के दौरान मां भगवती के गर्भगृह के कपाट स्वत ही बंद हो जाते हैं और उनका दर्शन भी निषेध हो जाता है। इस पर्व की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व से इस पर्व में तंत्र-मंत्र-यंत्र साधना हेतु सभी प्रकार की सिद्धियाँ एवं मंत्रों के पुरश्चरण हेतु उच्च कोटियों के तांत्रिकों-मांत्रिकों, अघोरियों का बड़ा जमघट लगा रहता है। तीन दिनों के उपरांत मां भगवती की रजस्वला समाप्ति पर उनकी विशेष पूजा एवं साधना की जाती है।

रजस्वला की स्थिति आने पर मंदिर के पुजारी माता की महा मुद्रा के चारो ओर एक स्वेत वस्त्र बिछा देते है और जब पुजारी तीन दिनों के बाद मंदिर खोलता है तो उन्हें और अन्य भक्तों को यह पता चलता है कि माहवारी के कारण यह कपड़ा नम हो रहा है। इस कपड़े को ‘अंबाची’ कहा जाता है और यह कपडा भक्त गणो के बीच प्रसाद के रूप में  वितरित किया जाता है। यह मंदिर असम, भारत के नीलांचल पहाड़ी पर मौजूद है। यह एक और अदृश्य तथ्य यह है कि यह एक वास्तविक कामाख्या मंदिर नहीं है। हां, एक ऋषि ‘मुनी वशिष्ठ’ के अभिशाप से वास्तविक कामख्या पीठ गायब हो गई थी।

यह एक और अतीत है कि एक बार एक आसुर जिसका नाम है “नारकसुर” कामाख्या देवी से शादी करना चाहता था और माता ने शर्त लगाई कि यदि सूर्योदय से पहले एक दिन में मेरे लिए एक मंदिर बना पाए, तो मैं तुमसे विवाह करुँगी। इस शर्त के साथ उन्होंने मंदिर, कुंड, आदि का निर्माण करने के लिए एक ठेकेदार को किराए पर लिया। इसका नाम भगवान ‘विश्वकर्म’ है। जब माता को पता था कि वह मंदिर पूरा हो रहा है, तो उसने अपने चतुर दिमाग का इस्तेमाल किया और वास्तविक सूर्योदय से पहले सूर्योदय की जानकारी प्रदान की मायारुपी मुर्गे की सहायता से और यह शादी नहीं हो पायी और माता ने भगवन विष्णु की सहायता से उस दुस्ट आसुर राजा नरकासुर का वध कर दिया।

स्थान:

असम, भारत में गुवाहाटी शहर के पश्चिमी भाग में निलाचल हिल

जाने के तरीके:

बस से: असम पर्यटन विभाग सड़क मार्ग

ट्रेन द्वारा: गुवाहाटी रेलवे स्टेशन (मंदिर से लगभग 7 किमी)

उड़ान से: लोकप्रिया गोपीनाथ बोर्डोली हवाई अड्डा गुवाहाटी हवाई अड्डा (मंदिर से लगभग 13 किमी)

जाने का समय:

किसी भी समय आप जा सकते हैं लेकिन त्यौहार सत्र में (‘अंबुब्सी’ कामाख्या में सबसे बड़ा त्योहार है, जब सबसे बड़ा मेला या भीड़ कामाख्या में प्रस्तुत किया जाएगा और अन्य नवरात्रि, दुर्गापुजा इत्यादि)

आपको त्यौहार सत्र में 4 या 5 घंटे के लिए कतार में इंतजार करना पड़ेगा।

यात्रा के लिए निकटतम स्थान:

अवघमा मंदिर – चित्रासल हिल्स, गुवाहाटी भारत (कामख्या मंदिर से लगभग 1.1 किमी)

उमा नंदा मंदिर – पीकोक आइलैंड, गुवाहाटी भारत (कामख्या मंदिर से लगभग 5.2 किमी)

भुवनेश्वरी मंदिर – कामरूप जिला, गुवाहाटी, भारत (कामख्या मंदिर से करीब 3.5 किमी)

इस्कॉन मंदिर गुवाहाटी – उल्बेरी चारली, दक्षिण सरानिया, गुवाहाटी 781007 भारत (कामाख्या मंदिर से 5.3 किमी)

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