Kinner Kailash Journey, Himachal Pradesh – यह हैं किन्नर कैलाश धाम

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Kinner Kailash Dham
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Kinner Kailash Yatra – इंसान एक बार ही कर पाता है हिम्मत:

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कहते है महादेव or देवो के देव महादेव Shiva के इस धाम (Yatra or journey) में जाने की इंसान एक बार ही कर पाता है हिम्मत – मानसरोवर कैलाश के बाद तिब्बत स्थित किन्नर कैलाश को ही second largest कैलाश पर्वत माना जाता है। सावन का month शुरू होते ही हिमाचल की dangerous कही जाने वाली किन्नर या किन्नौर कैलाश यात्रा (Kinner Kailash Journey) शुरू हो जाती है जो की 15 days तक चलती है। इस यात्रा के बारे में कहा जाता है कि इस यात्रा को अपने life time में आम आदमी एक ही बार करने की हिम्मत जुटा पाता है।

इस स्थान को भगवान शिव का शीतकालीन प्रवास स्थल माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की यहाँ सावन के time सारे देवी-देवता (all God and Goddess) धरती पर किन्नर कैलाश के दर्शन करने और Meeting करने आते है। किन्नर कैलाश (Kinner Kailash) सदियों से हिंदू व बौद्ध धर्म के devotees के लिए आस्था का केंद्र है। इस यात्रा के लिए देश भर से लाखों भक्त किन्नर कैलाश के दर्शन के लिए आते हैं। किन्नर कैलाश (Kinner Kailash) पर natural रूप से उगने वाले ब्रह्म कमल (Brahma Lotus) के हजारों पौधे देखे जा सकते हैं।

Physical Structure of Kinner Kailash:

भगवान शिव की तपोस्थली किन्नौर (Kinnaur) के बौद्ध लोगों और हिंदू भक्तों (Devotees) की आस्था (conviction) का केंद्र किन्नर कैलाश (Kinner Kailash) समुद्र तल (sea level) से 24 हजार फीट (24K feet) की ऊंचाई पर स्थित है। किन्नर कैलाश (Kinner Kailash) स्थित शिवलिंग की ऊंचाई 40 फीट और चौड़ाई 16 फीट (40×16) है। हर वर्ष सैकड़ों शिव भक्त जुलाई व अगस्त में जंगल व खतरनाक दुर्गम मार्ग से हो कर किन्नर कैलाश पहुचते हैं।

किन्नर कैलाश की यात्रा शुरू करने के लिए भक्तों को जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-5 स्थित पोवारी से सतलुज नदी (Satluj River) पार कर तंगलिंग गाँव (Village) से हो कर जाना पडता है। गणेश पार्क (Ganesh Park) से करीब पाँच-सौ मीटर (500M) की दूरी पर पार्वती कुंड (Parvati tank) है। इस कुंड के बारे में मान्यता है कि इसमें श्रद्धा से सिक्का (Coin) डाल दिया जाए तो मुराद (wish) पूरी होती है। भक्त इस कुंड में पवित्र स्नान (holy bathe) करने के बाद करीब 24 घंटे (24 hours) की difficult tracks पार कर किन्नर कैलाश (Kinner Kailash Yatra) स्थित शिवलिंग के दर्शन करने पहुँचते हैं। Return आते time devotees अपने साथ ब्रह्मा कमल (Brahma Lotus) और औषधीय फूल (Medicine Flower) प्रसाद (A small wish which is given by the lord to it’s devotees through Physical Medium) के रूप में लाते हैं।

Kinner Kailash Height

Staring in 1993:

1993 से पहले इस place पर Normal लोगों के आने-जाने पर Ban था। 1993 में tourists के लिए open कर दिया गया, जो 24000 फीट(24K Feet) की ऊंचाई पर स्थित है। ये 40 फीट ऊंचे शिवलिंग हैं। यह हिंदू और बौद्ध दोनों के ‍लिए पूजनीय स्थल (Holy Place) है। इस शिवलिंग के चारों ओर परिक्रमा करने की इच्‍छा लिए हुए भारी संख्‍या में श्रद्धालु (A large Number of devotees) यहां पर आते हैं।

Some Historical Facts about Kinner Kailash:

किन्नर कैलाश (Kinner Kailash) के बारे में अनेक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कुछ विद्वानों के विचार में महाभारत time में इस किन्नर कैलाश(kinner kailash) या Kinner Kailash Rock का नाम इन्द्रकीलपर्वत था, जहां भगवान शंकर और अर्जुन का युद्ध हुआ था और अर्जुन को पासुपातास्त्रकी प्राप्ति हुई थी। यह भी मान्यता है कि पाण्डवों ने अपने वनवास काल (A time period in which living in forest) का last time यहीं पर गुजारा था। Kinner Kailash को वाणासुर का कैलाश भी कहा जाता है। क्योंकि वाणासुरशोणित पुरनगरी का king था जो कि इसी area में पडती थी। कुछ विद्वान रामपुर बुशैहर रियासत की गर्मियों की राजधानी सराहन को शोणितपुरनगरी करार देते हैं। कुछ persons का कहना है कि किन्नर कैलाश(Kinner Kailash) पर ही Loard Krishna के पोते अनिरुध का विवाह ऊषा से हुआ था।

इस शिवलिंग का एक interest factor यह है कि दिन में कई बार यह रंग change करता है। Sunrise से पूर्व white, Sunset होने पर yellow, Mid day (In Noon) में यह red हो जाता है और फिर क्रमश: yellow, white होते हुए संध्या काल (at the time of dusk) में black हो जाता है। क्यों होता है ऐसा, इस mystery को अभी तक कोई नहीं सुलझा सका है। किन्नौर (Kinnaur) के लोग इस शिवलिंग के रंग change करने को किसी दैविक शक्ति का चमत्कार मानते हैं, कुछ बुद्धिजीवियों का मत है कि यह एक स्फटिकीय रचना है और सूर्य की किरणों के विभिन्न कोणों में पडने के साथ ही यह चट्टान (Rock) रंग change करती हुई नजर आती है ।

Badrinath of Himachal:

Kinner Kailash को Himachal का बदरीनाथ भी कहा जाता है और इसे Rock Chaslche नाम से भी जाना जाता है। इस शिवलिंग की परिक्रमा करना बडे साहस और जोखिम का work है। कई शिव भक्त जोखिम उठाते हुए स्वयं को रस्सियों से बांध कर यह परिक्रमा पूरी करते हैं। पूरे पर्वत का चक्कर लगाने में one week से 10 days का समय लगता है। ऐसी मान्यता भी है कि किन्नर कैलाश (Kinner Kailash) की यात्रा से wishes तो पूरी होती ही हैं। यहां से दो किलोमीटर दूर रेंगरिकटुगमा में एक बौद्ध मंदिर है। यहां लोग मृत आत्माओं की शान्ति के लिए दीप जलाते हैं। यह मंदिर बौद्ध व हिन्दू धर्म का संगम भी है। भगवान बुद्ध की अनेक छोटी-बडी मूर्तियों के बीच दुर्गा मां की भव्य मूर्ति भी स्थित है।

Kinner Kailash Dham

How to Start Journey:

First Day:

सबसे पहले सभी यात्रियों को इंडो तिब्‍बत बार्डर पुलिस पोस्‍ट पर यात्रा के लिए अपना Registration कराना होता है। यह पोस्‍ट 8,727 फीट की ऊंचाई पर है। यह किन्‍नौर जिला मुख्‍यालय रेकांग प्‍यो से 41 किमी की दूरी पर है। उसके बाद लांबार के लिए प्रस्‍थान करना होता है। यह 9,678 फीट की ऊंचाई पर है। जो 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां जाने के लिए खच्‍चरों का सहारा लिया जा सकता है।

Second Day:

इसके उपरांत 11,319 फीट की ऊंचाई पर स्थित चारांग के लिए चढ़ाई करनी होती है। जिसमें कुल 8 घंटे लगते हैं। लांबार के बाद ज्‍यादा ऊंचाई के कारण पेड़ों की संख्‍या कम होती जाती है। चारांग गांव के शुरू होते ही सिंचाई और स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का गेस्‍ट हाउस मिलता है, जिसके आसपास tents में यात्री विश्राम करते हैं। इसके बाद 6 घंटे की चढ़ाई वाला ललांति (14,108) के लिए चढ़ाई शुरू हो जाती है।

Third Day:

चारांग से 2 किलोमीटर की ऊंचाई पर रंग्रिक तुंगमा का मंदिर स्थित है। इसके बारे में यह कहा जाता है कि बिना इस मंदिर के दर्शन किए हुए परिक्रमा अधूरी रहती है। इसके बद 14 घंटे के long track की शुरूआत हो जाती है।

Fourth Day:

इस दिन एक ओर जहां ललांति दर्रे से चारांग दर्रे के लिए लंबी चढ़ाई करनी होती है, वहीं दूसरी ओर चितकुल देवी की दर्शन हेतु लंबी दूरी तक उतरना होता है।

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