शिव का निवास कैलाश – कैलाश मानसरोवर

0
447
- Advertisement -
- Advertisement -

कैलाश मानसरोवर-

हिमाच्छादित पर्वतो के समीप कैलाश मानसरोवर संभवत विश्व का सबसे दुर्गम तीर्थ है। यह विश्व का निवास स्थान हैं। यही वह आकर्षण है, जो श्रद्धालुओ को यहाँ खींच लाता है और वे प्राणों की भी परवाह नहीं करते हैं। इस पवित्र धवल को देखने पर ऐसा लगता है, जैसे वह स्फटिक का बना हो। स्फटिक को संस्कृत में केलास कहते है। इसलिए इस्फटिक के सद्रश्य इस पर्वत का नाम कैलाश रखा गया।

कैलाश पर्वत कहानी-

पौराणिक कथा के अनुसार शिव तपस्या से रावण ने महान बल प्राप्त किया था। उसने अपने बल से संसार में सुर और असुर विजित कर लिया था। उसके बल के आगे कोई योद्धा नहीं बचा था। अतः उसे कैलाश दिखाई दिया। अभिमान में आकर उसने कैलाश को उठा लिया। इस पर शिव ने पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत को दबा दिया। इससे रावण का पाताल में रहना भी मुश्किल हो गया। तब रावण ने शिव तांडव स्रोत का गायन कर शिव को प्रसन्न किया।

शिवलिंग का विराट प्रतीक-

हिमालय के उत्तर में स्थित तिब्बत में कैलास पर्वत माला के बर्फ से आच्छादित 22,028 फिट ऊंचे उत्तरी शिखर को कैलाश कहते हैं। ऐसा मन जाता है की प्राचीन साहित्य में उल्लेखित मेरु या सुमेरु पर्वत भी यही है। कैलास की आकृति विराट शिवलिंग जैसी है। कैलाश के चतुर्दिक 6 पर्वत श्रेणियाँ है, जिनके 16 शिखर षोडशदल कमल की आकृति बनाते है। यह कमलाकार शृंग वाले पर्वत विराट शिवलिंग के लिए अर्धा बनाते जान पड़ते है। ऐसे 14 पर्वत शृंग तो साफ़ गिने जा सकते है, किंतु सम्मुख के दो श्रृंग झुककर लंबे हो गए है। इस कमलवत आकृति के बीच में कैलास स्थित है। कुछ लोग इन श्रृंगो की इस प्रकार व्यख्या करते है, जैसे कैलास पर्वत की चोटी के नीचे काला हिमरहित भाग शिव की नील ग्रीवा जैसा दिखता हैं। क्षेतीज विस्तार में कहीं-कहीं जमी बर्फ व् बीच-बीच में दिख रही काले पत्थर की पट्टियां मृगछाला का आभास देती है। चोटी से बह रहे जल स्रोत शिव की जटाओ से बहने वाली गंगा का द्रश्य उपस्थित करते हैं। कुल मिलाकर ऐसा लगता है, जैसे शिव पद्दासन में बैठे है और उनकी मृगछाला चारो ओर फैली है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here