अपनी पत्नी के गुस्से को शांत करने का रोचक उपाय, एक प्रसिद्ध कहानी से जाने

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अपनी पत्नी के गुस्से को शांत कैसे करे?
अपनी पत्नी के गुस्से को शांत कैसे करे?
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आज के समय में इस व्यस्त और भीड़ भाड़ वाली जिन्दगी में कोई भी सुखी नहीं है और इसी के चलते एक ग्रहस्त जीवन में भी कई तरह की बाधाये आती है कई लोग इससे टूट जाते है या फिर संभल जाते है। आज हम बात कर रहे है पति और पत्नी की जिनके जीवन में काफी उतार और चढाव आते है जिससे इनके वय्वाहारो में परिवर्तन आ जाता है जिससे इनमे दुरिया आ जाती है और ये लोग गुस्से में एक दुसरे से अलग हो जाते है। आज हम आपको एक ऐसे प्रसिद्ध व्यक्ति की कहानी सुनाता है जो न केवल एक संत था अपितु एक सयमी व्यक्तित्व वाला इन्सान भी था। इस महान पुरुष का नाम संत तुकाराम था और उनकी पत्नी का नाम जीजाबाई। संत तुकाराम तो बहुत ही शांत और दूसरी तरफ उनकी पत्नी का स्वाभाव बहुत ही ज्यादा गुस्सेल और कटु वाणी वाला था। जब कभी भी जीजाबाई को गुस्सा आता वो अपने मुख से बहुत ही ज्यादा कटु शब्द बोलती, उन्हें यह तक होश नहीं रहता था की वो किस्से और क्या बोल रही है लेकिन तुकाराम चुप चाप शांति रखते हुए ये सुब सुनते और हस्ते मन ही मन। वो इन कटु शब्दों को कडवा जहर समझ कर पी लेते। लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ की जीजा बाई का स्वाभाव बदल गया उनके पति के सयम की वजह से।

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एक बार संत तुकाराम अपने खेत से कुछ गन्ने लेकर घर को लोट रहे थे की कुछ परिचितों ने उन्हें रोका और कहा की इन गन्नो में से कुछ हमें भी दे देदीजिए तुकाराम जी। तुकाराम जी स्नेही दिल के तो थे ही तो उन्होंने एक-एक गन्ना सभी परिचितों को दे दिया, अंत में उनके पास सिर्फ एक गन्ना शेष रह गया। जब तुकाराम अपने घर एक गन्ने के साथ पहुँचे, तो उनकी पत्नी ने बहुत गुस्सा किया, उस समय संत तुकाराम की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी और घर में खाने को भी कुछ नहीं था, इसके चलते उनकी पत्नी ने अपने गुस्से में उसी गन्ने को उनकी पीठ पर दे मारा, जिससे उस गन्ने के दो टुकड़े हो गए। पत्नी से मार खाने के बाद, संत तुकाराम जी ने मुस्कराते हुआ कहा, "हे भगवान! अच्छा किया जो तूने सहज ही इस गन्ने के दो टुकड़े मेरी इस पत्नी से करा दिए, नहीं तो मुझे इस गन्ने को हम दोनों को खाने के लिए पूरी ताकत लगा कर दो हिस्सों में तोडना पड़ता।", यह बात सुनकर झट से उनकी पत्नी हस पड़ी और घर का माहोल गुस्से से ख़ुशी में तब्दील हो गया। इसके बाद कभी भी उनकी पत्नी ने गुस्सा नहीं किया और उनका जीवन सुखमय हो गया। इसलिए कहा जाता है की अगर आप में सयम और शांति है तो समझ लीजिये की सारा संसार भी शांत है क्योकि क्रोध और कटु भाषा से केवल काम बिगड़ते है बनते नहीं है। इस लिए तो कहा जाता है अगर इन्सान को शांति चाहिये तो सबसे पहले उसे अपने आप को शांत करना होगा, सारा संसार स्वंम ही शांति की कगार पर पहुँच जायेगा।

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