Rakhsha Bandhan 2018: रक्षाबंधन के पर्व से जुडी कुछ रोचक, पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियाँ

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Rakhsha Bandhan 2018: रक्षाबंधन के पर्व से जुडी कुछ रोचक, पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियाँ
Rakhsha Bandhan 2018: रक्षाबंधन के पर्व से जुडी कुछ रोचक, पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियाँ
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रक्षाबंधन का त्यौहार:

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रक्षाबंधन नाम में ही दम है, एक रक्षा रूपी कवच जो एक माँ अपने बेटे को, पत्नी अपने पति को, एक बहिन अपने भाई को, एक बेटी अपने पिता को उनकी रक्षा के लिए बांधती हैं। उनसे लड़ लें, चाहे कितना ही झगड़ लें, लेकिन अंत में जितना प्यार हम उनसे करते हैं उसके सामने दुनिया की कोई भी मूल्यवान वस्तु बेकार है। बचपन से बड़े होने तक और बाद में बहन की शादी के बाद अलग हो जाने पर भी बहन-भाई का प्यार कम नहीं होता। एक बहन का प्यार ऐसा है कि चाहे उसका भाई उसकी कोई बात ना माने, फिर भी वह आखिरी श्वास तक चाहेगी कि उसका भाई हमेशा खुश रहे। ये जरुरी नहीं है की रक्षा सूत्र (राखी) केवल भाई को ही बाधा जाये, ये रक्षा सूत्र आप अपने पति, पिता को भी बांध सकती है उनकी लम्बी उम्र और हमेशा खुश रहने की मंनोकामाना से। हम इंसानों के अलग अलग नाम रख दिए जैसे की एक रक्षाबंधन (भाई बहन के रिश्ते को दिखाने के लिए), मंगलसूत्र (पति के रिश्ते को दिखाने के लिए), ये सभी एक रक्षासूत्र ही तो है जिसे हम अलग अलग रूपों में दिखाते है। यही है India का culture, जिसे बार बार निभाने का दिल करता है। एसी ही कुछ रोचक और interesting stories हम आपको बताने जा रहे है, जो की इस प्रकार है:

देवराज इंद्र एंड इन्द्राणी शचि:

पौराणिक काल के समय, एक बार की बात है देवो और राक्षसों के बीच युद्ध चल रहा था, इससे देवराज इंद्र भयभीत हो गए की वे लोग हार जायेंगे राक्षसों से, इस भय को दूर करने के लिए देवराज इंद्र की पत्नी रानी शचि ने एक रक्षा कवच तैयार किया और उसे ब्रहस्पति से बंधवा दिया जो की देवो के गुरु थे, जिससे उनकी विजय हुई।

रानी कर्णावती और हुमायूँ:

एक बार की बात है चितौरगढ़ की रानी करनावती ने अपने पति को हारता देख मुग़ल बादशाह हुमायूँ को भाई मानकर के रक्षासूत्र भेजा जिसे हुमायूँ ने accept कर लिया और उनसभी की रक्षा के लिए बहादुरशाह जफ़र से युद्ध किया और विजय पताका लहराई।

भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी:

यह कहानी भगवन विष्णु जी को लेकर बताई गयी है, जिसके अनुसार राजा बालि ने जब 110 यज्ञ पूर्ण कर लिए तब देवताओं का डर बढ़ गया। उन्हें यह भय सताने लगा कि यज्ञों की शक्ति से राजा बलि स्वर्ग लोक पर भी कब्ज़ा कर लेंगे, इसलिए सभी देव भगवान विष्णु के पास स्वर्ग लोक की रक्षा की फरियाद लेकर पहुंचे। भगवान विष्णु ने अपने वामन अवतार को भिक्षा मांगने के लिए राजा बालि के पास भेजा। वामन अवतार विष्णु जी राजा बालि के पास पहुच गए भिक्षा मांगने के लिए और उनसे तीन पग भूमि मांग ली दान में। राजा भी बड़ा अभिमानी था तो उसने सोच में दे दूंगा तीन पग भूमि दान में तो उसने वचन दे दिया की मै अपनी बात से मुक्रुंगा नहीं। भगवन ने एक पग में धरती, एक पग में आकाश और जब जगह नहीं बची तो तीसरा पग यानि की foot राजा के सर पर रख दिया जिससे वह पाताल में धसता ही चला गया लेकिन उसने भी भगवन से वरदान में अपना दुवारपल बनने का वचन ले लिया, लेकिन इससे सारा जगत भय भीत हो गया था, इस problem का solution निकालने के लिए नारद मुनि जी ने लक्ष्मीजी को एक idea दिया की वे राजा बालि के पास जाकर रक्षासूत्र राखी के रूप में बांध दे ना जिससे भगवान पाताल नगरी से मुक्त हो जायेंगे और ऐसा हुआ भी। इसलिए कहा जाता है की रक्षा बंधन केवल भाई के लिए ही नहीं अपितु पति भी अपने पति के लिए कर सकती है।

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