भारत के हर राज्य में होली मनाने का महत्व

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अनेकता में एकता का सशक्त उदाहरण है होली। गुलाल चेहरे पर जब आता है, चेहरा खिल जाता है। होली के रंग भी मन को कुछ ऐसे ही छूते है। राधा कृष्ण के प्रेम को हर स्थान पर अपने-अपने अंदाज में मनाया जाता है। यह उत्सव फागुन माह की पूर्णिमा से शुरू हो जाता है। होली की तेयारिया एक माह पहले ही शुरू हो जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन व दूसरे दिन धुलंडी मनायी जाती है। राधा कृष्ण के प्रेम को होली के रूप में बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। अलग अलग स्थानों में होली अलग अलग अंदाज में मनाई जाती है।

महाराष्ट्र (रंगपंचमी)

रंगपंचमी होली का ही एक रूप है जो होली के पांचवे दिन महाराष्ट्र में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। होलिका दहन के पांच दिन बाद रंगपंचमी मनायी जाती है। रंगपंचमी होली उत्सव का आखिरी दिन होता है। महाराष्ट्र के तटीय इलाको में मछुआरो के लिय रंगपंचमी का काफी महत्व है। इस समय को शादी के लिए उत्तम माना जाता है।

मणिपुर (याओसांग)

मणिपुर का याओसांग उत्सव होली के जैसा होने के कारण इसे मणिपुर की होली भी कहा जाता है। मणिपुर में होली से मिलता जुलता याओसांग नामक पर्व मनाया जाता है। इस दिन को चेतन्य महाप्रभु के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दोरान वैष्णव पंथ के लोगो द्वारा छोटी-छोटी झोपडिया बनाई जाती है। जिन्हें याओसांग कहते है। चेतन्य महाप्रभु की मूर्ति को उसमे स्थापित कर शाम को पूजा की जाती है।झांझ और ढोल बजाकर कीर्तन किया जाता है। फिर चेतन्य महाप्रभु की मूर्ति को निकालकर इन झोपड़ियो को जला दिया जाता है। उसके बाद रख को इक्कठा कर अपने माथे पर लगाने की परंपरा है।

कुमाऊँ (संगीत होली)

राधा कृष्ण के प्रेम को हर स्थान पर अपने अंदाज में गाया जाता है। लेकिन कुमाऊँ के लोगो ने होली के रंगों में जो शास्त्रीय संगीत का सुंदर समिश्रण किया है। उतराखंड की कुमाऊँ की होली अपने भीतर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व समेटे हुए है। यहाँ पर होली का उत्सव करीब दो माह तक चलता है। होली न केवल बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है बल्कि शीत ऋतु के समापन और कृषको के लिए बुआई के मोसम की शुरुआत भी है। भले ही ये रीती-रिवाज अक्पने मूल से लुप्त हो चुके हो लेकिन कुमाऊँ में उनकी विरासत आज भी जीवित है।

राजस्थान (गुलाबी नगर की होली)

जयपुर भी अपने शाही अंदाज के लिए प्रसिद्ध है। गुलाबी नगर की होली आपको येह आने के लिए निमंत्रित करती सी दिखाई देती है। गुलाबी शहर की होली को खास बनाते है। यहाँ के गुलाल गोटे ये लाख की छोटी-छोटी गोलियों होती है। जिसमे गुलाल भरा होता है। जब इन्हें किसी पर मारा जाता है तो उसमे भरा गुलाल फूटकर बिखर जाता है। पहले राजा-महाराजा इन गोलियों को प्रजा पर फेककर होली खेला करते थे।

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