History Behind the Maa Tripura Sundari Temple

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tripura sundari temple
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History of Tripura Sundari Temple:

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Shakti के बिना life की कल्पना असंभव हैं। पौराणिक मान्यता है कि शक्ति ही संसार का कारण हैं। जो अनेक रूपों में हमारे अंदर और आस पास चर-अचर जड़-चेतन सजीव-निर्जीव अनेक रूपों में समायी हैं। और एक ऐसी ही शक्ति है Maa Sundari। यह अति पावन स्थान Rajasthan के Banswara जिले से 14 किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं। यह temple माता शक्ति के 52 शक्ति पीठो में से एक हैं।

माना जाता है की इसका निर्माण 3 century में हुआ था। बाद में 16 century में पांचाल राजाओ ने इसका जीणोद्धार करवाया। कहा जाता है कि maa के temple के आस पास तीन दुर्ग हुआ करते थे। शक्ति पूरी, शिवपुरी, और विष्णुपुरी इन पुरियो या दुर्गो के कारण ही माता का नाम त्रिपुरी सुंदरी पड़ा।

Maa Tripura Sundari का प्रवेश द्वार अति भव्य है। इस द्वार को सुन्दर कारीगरी से सजाया गया हैं। temple का परिसर बेहद बड़ा हैं। इसके चारो तरफ दीवारों पर पवित्र मन्त्र लिखे गए हैं। मंदिर परिशर में ही माता का शस्त्र त्रिशुल भी स्थापित हैं। मुख्य गर्ब ग्रह द्वार पर माता के वाहन शेर की प्रतिमा स्थापित हैं। यह पर गणेश और माँ काली की प्रतिमाय भी स्थापित हैं। तीनो पुरियो में स्थित देवी त्रिपुरा के गर्ब ग्रह में देवी की 18 भुजाओ वाली श्याम वर्णित भव्य तेज युक्त आकर्षक मूर्ति स्थापित हैं। इनके आस पास 9 मूर्तिया है जिन्हे 10 महा विधा या 9 दुर्गा कहा जाता हैं। इसके दर्शन मात्र से ही भक्त धन्य हो जाते हैं। कहा जाता है कि मालव नरेश जगदेश परमार ने तो मां के श्री चरणों में अपना शीश ही काट कर अर्पित कर दिया था। उसी समय राजा सिद्धराज की प्रार्थना पर मां ने पुत्रवत जगदेव को पुनर्जीवित कर दिया था।
माँ त्रिपुरा सुंदरी वागड़ प्रदेश में अत्यधिक लोकप्रिय है वहां के आदिवाशियों में देवी की अत्यधिक मान्यता हैं। Sunday के दिन देवी के मंदिर में बहुत चहल-पहल रहती हैं।

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