हाथ का वर्गीकरण – Palm Reading Tutorial 1

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हाथ का वर्गीकरण - Palm Reading Tutorial 1
हाथ का वर्गीकरण - Palm Reading Tutorial 1
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Palm Reading Tutorial

हाथ की बनावट यानी आकार, करप्रष्ठ आदि से मनुष्य की प्रवति, शक्ति, बौद्धिक स्तर एवं नैतिक चरित्र का पता चलता है। हाथ की आकृति एवं पर्वतों की रचना एवं रेखाचिंह प्रत्येक हाथ में अलग-अलग होते है, फिर भी सभी हाथों में कुछ समानताएँ भी होती हैं। भातीय मनीषियों ने व्यक्ति के गुणों के आधार पर हाथ को निम्न तीन भागो में विभक्त किया था-

1. सात्विक
2. राजस
3. तामस

परवर्ती विद्वानों ने इनके भी भेदोपभेद किये। उनका विचार था कि कोई भी हाथ ऐसा नहीं है जिसे शुद्ध रूप से उपर्युक्त प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सके। उनका मत था कि उपर्युक्त तीन प्रकारों में से किन्हीं दो के मिश्रित गुण ही प्राय: देखने को मिलते हैं। उनके द्वारा किया गया वर्गीकरण इस प्रकार है-

1. सात्विक हाथ
2. राजस हाथ
3. तामस हाथ
4. सात्विक-राजस मिश्रित हाथ
5. राजस-तामस मिश्रित हाथ
6. तामस-सात्विक मिश्रित हाथ, और
7. सात्विक-राजस-तामस मिश्रित हाथ

1. प्रारम्भिक हाथ –

ऐसा हाथ देखने में अत्यंत साधारण प्रकार का होता है, साधारण स्तर का जीवन जीने वाले व्यक्ति का हाथ होता है। ऐसे व्यक्तियो का मानसिक विकास अति न्यून होता है। हाथ की बनावट बहुत ही बेडोल होती है। खुरदरा एवं भारी होता है। अंगुलिया छोटी होती है। उन अंगुलियों तथा हाथ के पिछले हिस्से पर बाल अधिक होते है। ऐसे व्यक्तियों के जीवन का उद्देश्य रोटी कमाना मात्र होता है। ये रोटी, कपड़ा, मकान, के अतिरिक्त अन्य कुछ भी सोचने में असमर्थ होते है। इनमे तामसिक प्रवृति अधिक होती है। अधिकतर अपराधी प्रवृति के व्यक्ति इसी वर्ग में आते है। इनमे हिंसा की प्रवृति अधिक होती है। ऐसे व्यक्ति श्रम करने से कतराते है। अंगुलियों के साथ नाख़ून भी छोटे होते है। इनके रहन-सहन से भी आभास हो जायेगा की ये समाज के साथ नही रहना चाहते है। इनकी आकृति एवं आहार-विहार पशुवत होता है। प्राम्भिक हाथ पशुत्व हाथ कहना अधिक उचित होगा, क्योंकी ऐसे व्यक्ति मनुष्य का शरीर धारण करते हुए भी पशुओ जैसा ही आचरण करते है।

प्रारम्भिक हाथ - हाथो का वर्गीकरण
प्रारम्भिक हाथ – हाथो का वर्गीकरण

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2. वर्गाकार हाथ-

ऐसा हाथ उत्तम एवं श्रेष्ठ होता है। ऐसे व्यक्ति ईमानदार व्यवहार कुशल, भावुक, शिष्ट, धार्मिक, सदाचारी, शान्तिप्रिय, सात्विक, तर्कशील, धैर्यवान, लगनशील, श्रमशील, उदार, करुना, तथा परोपकार के साक्षात् रूप होते है। धार्मिक होते हुए भी अन्धविश्वासी नहिं होते है। शान्तिप्रिय होते हुए भी अन्याय का डटकर मुकाबला करते है। सहज होते हुए भी आँख बंद कर किसी की बात का तब तक विश्वास नही करते हैं, जब तक कि वे तर्क की कसौटी पर परख नहीं लेते। ऐसे व्यक्ति मिलनसार होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के हाथ के ऊपर तथा नीचे का भाग वर्गाकार होता है। ऐसे हाथों के नाख़ून छोटे तथा चोकोर होते है। ऐसे ही हाथ को श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसा व्यक्ति सफल उधोगपति, अधिकारी, समाजसेवी, नेता, संयासी, लेखक,तथा कृषक होता है। वह जिस क्षेत्र में भी रहता है समाज का नेतृत्व करता है। उसके के कारण समाज सम्मान तथा यश देता है।

वर्गाकार हाथ - हाथों का वर्गीकरण
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3. दार्शनिक हाथ-

सर्वोत्तम हाथ इसी वर्ग में आते हैं। नाम से दार्शनिक हाथ वाले स्वभाब और गुण से भी दार्शनिक श्रेणी के ही व्यक्ति होते हैं। ऐसे व्यक्ति उच्च राजनेता, आई.ए.एस अधिकारी, विचारक, दार्शनिक, लेखक, कवि, कलाकार, साहित्यकार, संन्यासी, समाज-सुधारक, वैज्ञानिक एंव युगपुरुष होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का हाथ लम्बा और नुकीला होता है। अंगुलियों का ढांचा विशेष प्रमुख होता है। अंगुलियों की गांठें उठी हुई और निकली हुई होती हैं। नाख़ून लम्बे होते हैं। ऐसा हाथ फुला हुआ होता हैं। ऐसा हाथ देखने में भी भिन्न-सा प्रतीत होता है। ऐसे व्यक्तियों का जीवन निरर्थक नहीं जाता है। वे जीवन में जो भी मापदण्ड निशिचित करते हैं, उस ऊँचाई तक पहुंचने में भी सफल होते है। ऐसे व्यक्ति जीवन में धन की अपेक्षा सम्मान को अधिक महत्व देते हैं। आदर्श एंव विश्वासों के प्रति गहन आस्था रखते हैं। स्वतंत्र चिन्तन होता है। यदि हाथ में अंगुलियाँ भी वर्गाकार हैं तो वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल होंगें। आर्थिक पक्ष भी सुद्रढ़ होता है। इनमें गौरव की भावना कुछ विशेष ही होती है। अत्यंत सोच-समझकर ही निर्णय लेते हैं। एक बार जो निर्णय ले लिया उस पर अटल रहतें हैं। धैर्यवान होते हैं। यदि अँगुलियों में गांठें निकल आयें तो ऐसे व्यक्ति विचार एंव आत्म-शक्तिमान होते हैं। यधि वर्गाकार अंगुलियां हैं तो ऐसे व्यक्ति धनी होने के साथ-साथ धैर्यवान भी होते हैं। यदि अंगुलियां नुकीली हैं तो ऐसा व्यक्ति संत होगा, आत्म-त्यागी प्रवृति का होगा।

दार्शनिक हाथ-हाथों का वर्गीकरण
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4. कर्मठ हाथ-

ऐसा व्यक्ति शारीरिक श्रम के साथ-साथ मानसिक श्रम की भी क्षमता रखता है। ऐसा व्यक्ति व्यर्थ और खाली नहीं रह सकता है। ऐसे व्यक्ति सदैव खोज में लगे रहते हैं तथा जिज्ञासु प्रवृति के होते हैं। व्यवहारिक जीवन जीते हैं। भावना प्रधान हिन होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का हाथ चौडाई की अपेक्षा लम्बा अधिक होता है। मणिबन्ध के निकट का भाग भारी तथा अग्र भाग हल्का होता है। देखने में ऐसा हाथ बड़ा ही कुरूप, अस्त-व्यस्त तथा बेडौल आकार का होता है। आगे का हाथ फैला हुआ तथा अँगुलियों के सिरे फैले हुए होते हैं। हथेली मांसल होने के साथ-साथ कठोरता लिये होती है। ऐसा व्यक्ति कठोर जीवन से भागता नहीं हैं, पलायनवादी निति विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं स्वीकार करता है। अपने लक्ष्य में जूता रहता है। स्वतन्त्र प्रकृति का होता है। किसी के मामले में हस्तक्षेप नहीं करता है और न स्वयं के मामले में किसी का हस्तक्षेप चाहता है। क्रोध करना इनकी प्रवृति है। ऐसे व्यक्ति शोधकार्य, इन्जीनियर, डाक्टर, इतिहासवेता, वैज्ञानिक एंव राजनेता, क्रान्तिकारी व तांत्रिक के रूप में विशेष सफलता अर्जित करते हैं। वैसे भी इनमे इतनी क्षमता होती है की जीवन के जिस क्षेत्र में भी प्रवेश करते हैं, वहां अपने को सफल बना ही लेते हैं। इनकी कार्य-प्रणाली बिलकुल अनोखी होती है। जिज्ञासु प्रवृति इनकी सफलता का मुख्य रहस्य हैं।

कर्मठ हाथ- हाथों का वर्गीकरण
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5. कलात्मक हाथ-

यह हाथ देखने में जितना सुन्दर होता है उतना ही जीवन में असफल होता है। पलायनवादी व्यक्ति, असफल प्रेमी, बिगड़े हुए राजकुमार इसी वर्ग के व्यक्ति होते हैं। ऐसा हाथ देखने में बहुत सुन्दर स्त्री का हाथ हो। देखने में अधिक सुकुमार होता है। नाख़ून लम्बे और बादामी रंग के या गुलाबी रंग के बादाम के आकार जैसे होते हैं। मानव जाति का सबसे सुन्दर हाथ इसी वर्ग में आता है। हाथ में सुन्दरता की जो भी कल्पना की जा सकती हैं, वह इसी वर्ग के हाथ में मिलती है। ये हाथ निश्चय ही अदितीय सुन्दर होते हैं परन्तु जीवन उतना ही कलहपूर्ण रहता है। ऐसे व्यक्ति सौन्दर्य- प्रेमी, अनंगप्रिय, शौकीन प्रवृति, कलाकार, संगीतकार तथा साहित्य-प्रेमी होते हैं। ऐसे व्यक्ति विलासितापूर्ण जीवन जीने की प्रवृति रखते हैं। इन्हें पूरी तरह से अकर्मण्य व्यक्ति कहा जा सकता है। ऐसा व्यक्ति भावना-प्रधान होता है। ये अपना जीवन प्रेममय रखते हैं। एक से असफलता मिली तो दूसरे की खोज में निकल पड़ते हैं। आर्थिक क्षेत्र में तो प्राय: असफल रहते ही हैं, दाम्पत्य जीवन में भी असफल रहते हैं। ये व्यावहारिक जीवन में भी असफल सिद्ध होते हैं। ऐसा व्यक्ति देखने में सुशील, सभ्य, नम्र, शान्तिप्रिय तथा मृदुभाषी लगेगा, जबकि वह बहुत ही लापरवाह तथा संकुचित विचारधारा वाला होता है। कुछ व्यक्ति अवश्य ही कला के माध्यम से धन एंव कीर्ति अर्जित करने में सफल होते हैं।

कलात्मक हाथ - हाथों का वर्गीकरण
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6. आदर्श हाथ-

ऐसे व्यक्ति अपने आदर्शो के कारण व्यावहारिक जगत में असफल रहते हैं। ऐसे व्यक्ति निष्ठावान, लगनशील तथा सिद्धांतवादी होते हैं। ये जीवन में केवल आत्मविश्वास से सफलता अर्जित करते हैं। कभी-कभी यही आत्मविश्वास असफलता के गर्त में भी धकेल देता है। ऐसे व्यक्ति के हाथ का गठन सुडौल, त्वचा का रंग गुलाबी तथा हथेली कोमल होती है। ऐसे व्यक्तियों में इच्छा-शक्ति बहुत अधिक होती है। लापरवाह होते हैं। लेकिन जिस कार्य में एक बार जुट गये, बिना समाप्त किये नहीं हटते हैं। बाल की खाल निकलना इनका स्वभाव होता है। प्रत्येक कार्य में अति करना इनकी प्रवृति है। इसी प्रवृति के कर्ण कई बार इन्हें समाज में तिरस्कृत होना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति आदर्श की बातें तो करते हैं किन्तु संघर्ष की स्थिति से घबराते हैं। काल्पनिक आदर्शो की खाल ओढें रहते हैं। यही कारण है कि ये व्यावहारिक जीवन में असफल होते हैं। अकारण शत्रुता लेना इनका स्वभाव है। धन आने पर संचय करना नहीं जानते, अपितु जब तक उसे पूर्णरूपेण खर्च नहीं कर लेते, तब तक शांति नहीं मिलती। ऐसे व्यक्ति को अपव्ययी ही कहा जा सकता है। इनकी इसी मनोवृति के कारण जीवन में ऐसे भी अवसर आते हैं जब इन्हें भूखा तक रहना पड़ता है। भौतिक उपलब्धियों में ऐसे व्यक्ति पूर्णतया असफल होते हैं। जीवन का अन्तिम भाग ही कष्टमय व्यतीत होता है।

आदर्श हाथ- हाथों का वर्गीकरण
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7. मिश्रित हाथ-

ऐसे व्यक्तियों में अपना कुछ भी नहीं होता है। जिस किसी से प्रभावित हो गये, उसे आदर्श बनाकर जीवन-यापन करते हैं। इनका कोई आदर्श तथा चिन्तन नहीं होता है। इनका चिंतन कभी उदार, तो कभी स्वार्थपूर्ण होता है। इसी कारण ये व्यक्ति जीवन में असफल, दुखी व् दरिद्र रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों के हाथ में यह विशेषता होती है की प्रथम छ: प्रकार के हाथों के कुछ-न-कुछ गुण अवश्य होंगें। किसी का कोई लक्षण है तो किसी का कोई। हथेली किसी वर्ग की है तो अंगुलियां किसी अन्य वर्ग की। यदि कोई अंगुली नुकीली है तो कोई फैली हुई हो सकती हैं। ऐसे व्यक्तियों में यदि अनेक गुण होते हैं तो अनेक अवगुण भी होते हैं। इनका चरित्र, प्रवृति, स्वभाव मिश्रित होगा।

मिश्रित हाथ- हाथों का वर्गीकरण
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इसी कारण इनका व्यक्तित्व प्रभावहीन होता है। ये शंकालु प्रवृति के व्यक्ति होते हैं। अधिकांश असफलताओं के कारण ऐसे व्यक्ति निराशावादी प्रवृति के व्यक्ति हो जाते हैं। जीवन के प्रति उदासीन हो जाते हैं। कठोर श्रम से डरते हैं, जिससे आशातीत परिणाम की उपलब्धि नहीं हो पाती है। आंशिक रूप से अस्थिर तथा परिवर्तनशील रहते हैं। परिवर्तन करने की प्रवृति के कारण हानि भी उठानी पडती है। ऐसे व्यक्तियों के हाथ में भाग्य रेखा या मस्तिष्क रेखा यदि अच्छी है तो जीवन में कुछ उपलब्धियां भी हो जाती हैं और ऐसा यदि नहीं है तो सामान्य जीवन जीने के लिए ही मजबूर होते है।

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