मौत के देवता यमराज (धर्मराज) का एक अनोखा मंदिर

0
444
यमराज मंदिर
- Advertisement -

Famous Yamraj Temple Story:

- Advertisement -

आज के इस बढ़ते समय में भगवन पर लोगो का विस्वास दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा हैं। साथ ही उनसे जुडी मान्यताओं को भी मानते हैं। इसी प्रकार लोग यमराज और चित्रगुप्त की कहानियों में भी विश्वास करते हैं। जो काफी हद तक सच मानी गयी हैं। यमराज और चित्रगुप्त के नियमो से आप सभी परचित होंगे।

दिल्ली से करीब 500 किलोमीटर की दूरी पर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान में स्थित एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां की मान्यताये प्रचलित हैं। क्योकि यहा के लोग मंदिर के बाहर जाकर भी मंदिर के अंदर नहीं जा पाते हैं। क्योकि उनका मानना है की यह मंदिर यमराज जी के चित्रगुप्त का हैं।

यह मंदिर यमराज जी का दुनिया में इकलौता मंदिर है। मंदिर में एक खाली कमरा है जिसे चित्रगुप्त जी का कमरा माना जाता है। कहने को तो चित्रगुप्त जी यमराज जी के सचिव है जो जीवात्मा के कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं चम्बल में इस मंदिर की विशेष मान्यता हैं। किसी प्राणी की मत्यु होने पर यमराज जी के दूत आत्मा को इस मंदिर में ला के चित्रगुप्त के सामने खड़ा कर देते हैं। फिर चित्रगुप्त जीवात्मा को उसके कर्मो का ब्यौरा बताते हैं। जिसके ठीक बाद चित्रगुप्त के सामने के कक्ष आत्मा को ले जाया जाता हैं।

इस कमरे को यमराज जी की कचहरी बताया जाता हैं। यहां जीवात्मा को उसके कर्मो के अनुसार यमराज
स्वर्ग व नर्क का फैसला सुनते हैं। जिस प्रकार गरुण पुराण में यमराज के दरबार में चार दिशाओ के चार दरवाजो के बारे में उल्लेख दिया गया हैं। ठीक उसी प्रकार इस मंदिर में भी चार अद्रश्य द्वार है जो स्वर्ण, रजत, तांबा, और लोहे से बने हुए है। यमराज जी की इस कचहरी में यमराज जी के फैसला सुनाने के बाद जीवतात्मा को स्वर्ग या नर्क ले जाया जाता हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here