चार युगों के बारे में तो आपने सुना ही होगा पर क्या आप जानते हैं इनसे जुड़े कुछ unseen facts

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चार युगो से जुड़े facts

चार युगो के बारे में तो सुना होगा पर उनके mystery के बारे में आप नहीं जानते होंगे आज हम आपको उन्ही mysteries के बारे में दिलचस्प बाते बताने जा रहे हैं।

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ज्योतिष ग्रंथ सूर्य सिद्धांत व अन्य पुराणों एवं वेदो के अनुसार एक तिथि वह time होता है, जिसमें sun और moon के बीच का देशांतरीय कोण 12 अंश बढ़ जाता है। तिथियां दिन में किसी भी time शुरू हो सकती हैं और इनकी अवधि 19 से 26 hours तक हो सकती है। 15 तिथियों का पखवाड़ा माना गया है। शुक्ल और कृष्ण पक्ष मिलाकर दो पक्ष का एक महीना। फिर दो महीने की एक ऋतु और इस तरह तीन ऋतुएं मिलकर एक अयन बनता है और दो अयन यानी उत्तरायन और दक्षिणायन। इस तरह दो अयनों का 1 year पूरा होता है। 15 मानव दिन एक पितृ दिवस कहलाता है यही एक पक्ष है। 30 पितृ दिवस का एक पितृ मास यानी month कहलाता है। 12 पितृ मास का एक पितृ year यानी पितरों का जीवनकाल 100 का माना गया है तो इस मान से 1500 मानव वर्ष हुए और इसी तरह पितरों के एक मास से कुछ दिन कम यानी मानव के 1 year का देवताओं का एक दिव्य दिवस होता है, जिसमें दो अयन होते हैं पहला उत्तरायण और दूसरा दक्षिणायन। तीस दिव्य दिवसों का एक दिव्य मास यानी month। बारह दिव्य months का एक दिव्य वर्ष कहलाता है।

1. 4800 दिव्य वर्ष अर्थात एक सतयुग। मानव वर्ष के मान से 1728000 वर्ष।

2. 3600दिव्य वर्ष अर्थात एक त्रेता युग। मानव वर्ष के मान से 1296000 वर्ष।

3. 2400दिव्य वर्ष अर्थात एक द्वापर युग। मानव वर्ष के मान से 864000 वर्ष।

4. 1200 दिव्य वर्ष अर्थात एक कलि युग। मानव वर्ष के मान से 432000 वर्ष।

सतयुग

इस युग में ज्ञान, ध्यान या तप की प्रधानता थी। प्रत्येक लोग दानपुण्य करके कर्मयोगी होती थे,अत:यह “कर्म युग ” कहलाता है। मनु का धर्मशास्त्र इस युग में एकमात्र अवलंबनीय शास्त्र था। महाभारत में इस युग के विषय में यह विशिष्ट मत मिलता है की कलयुग के बाद कल्कि द्वारा इस युग की पुन: स्थापना होगी।

17,28,000 वर्ष के सतयुग में मनुष्य की लंबाई 32 feet और उम्र 100000 वर्ष की बताई गई है। इसका तीर्थ पुष्कर और अवतार मत्स्य, हयग्रीव, कूर्म, वाराह, नृसिंह हैं। इस yug में जन्म लेने वाला पाप 0% जबकि 100 प्रतिशत पुण्य कर्म करता है। इस युग की मुद्रा रत्नों की और बर्तन gold के हुआ करते थे।

त्रेतायुग

त्रेतायुग युग चारो चरण में से एक चरण हैं। इस चरण vishnu ji के 5, 6, 7 avatar प्रकट हुए थे यह काल ram ji की death से समाप्त हुआ था। त्रेतायुग मे लोग कर्म करके फल प्राप्त करते थे।
12,96,000 वर्ष की कालावधि का त्रेतायुग तीन पैरों पर खड़ा है। इस युग में मनुष्य की आयु 10000 वर्ष और लंबाई 11 feet फिट की बतायी गई है। इसका तीर्थ पुष्कर और अवतार वामन, परशुराम और राम हैं। इस युग में पाप 25% जबकि पुण्य कर्म 75% होते हैं। रत्नों की मुद्रा और silver के पात्रों का चलन रहता है।

द्वापरयुग

द्वापरयुग में पाप और पुण्य बराबर थे। द्वापरयुग में bhagwan vishnu ji ने shri krishna ji का avatar लिया था।
8.64,000 वर्ष का समय लिए द्वापरयुग दो पैरों पर खड़ा है। इस युग में इंसान की आयु 1000 year और लंबाई 10 feet बताई गई है। इस युग का तीर्थ कुरुक्षेत्र और अवतार Lord shri krishna हैं। इस युग में पाप कर्म 50% और पुण्य भी 50% होते हैं। इस युग चांदी की मुद्रा और तांबे के पात्र चलन में रहते हैं।

कलियुग

कलियुग, सबसे घोर अत्‍याचारी युग माना जाता हैं। इन चारों युगों में से शुरूआत सतयुग से हुई थी और अंत, कलियुग पर होगा कलियुग में लालच, दुराचार, तृष्‍णा, क्रोध, वासना, स्‍वार्थ जैसी बेकार आदतें ही इंसान की मूल प्रवृत्ति बन जाएंगी। कलयुग का अंत करने के लिए Bhagwan kalki avatar लेंगे। और कलयुग का अंत करके पुन: सतयुग प्रारम्भ होगा।

4,32,000 वर्ष समय का कलियुग को एक पैर पर खड़ा बताया गया है। इस युग में मनुष्य की आयु 100 वर्ष और लंबाई 5 feet 5 inch बताई गई है। इसका तीर्थ गंगा और अवतार बुद्ध व कल्कि बताए गए हैं। इस युग में पाप कर्म 75% और पुण्य कर्म 25% होते हैं। इस युग की मुद्रा iron और पात्र मिट्टी के हैं।

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