प्राचीन Shiv Temples के लिए प्रसिद्ध है यह जिला – Champawat, Uttarakhand

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Shiva Temples
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A group of Shiv Temples – Sapt Swara, Champawat:

Kurm City के नाम से famous Champawat में भगवान Shiv के temples की भरमार है। district में सप्त स्वरों के नाम से famous temples में Shiv भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से devotees यहां पूजा अर्चना और मोक्ष मिलने की उम्मीद लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां के Shiv temples में सच्चे मन से पूजा अर्चना करने वालों की wishes मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

इस district में भगवान Shiv के Number of Shakti Peethas स्थापित हैं और आप कह सकते है की Shiv temples की भरमार है। यहाँ के सप्त स्वरों की परिक्रमा को अयोध्या की सप्तकोसी परिक्रमा की तरह पुण्य और मोक्ष की तरह माना जाता है। Sapt swara परिक्रमा City के बीचों बीच बने Baleshwar Shiv Temple से शुरू होती है। जहां से होते हुए second step में परिक्रमा Tadkeshwar पहुचती है। Tadkeshwar की परिक्रमा के बाद third step में परिक्रमा City के सबसे ऊंची चोटी पर बने Shiv Temple Kanteshwara पहुंचती है। बताया जाता है कि यहां के बाद मंच तामली मार्ग पर बने मल्लाड़ेश्वर Shiv के temple में fourth परिक्रमा की जाती है। fifth step की परिक्रमा न्याय की गुहार लगाने के प्रतीक हरेश्वर Temple में होती है। परिक्रमा का sixth step संतान सुख के प्रतीक लोहाघाट के ऋषेश्वर Temple में होता है। अर्जुन के गांडीव धनुष से निर्मित Maneshwar Shiv के Temple में seventh step of परिक्रमा माना जाता है। इसके अलावा भक्त Champawat के गंडकी नदी के संगम पर बने डिप्टेश्वर Temple की भी परिक्रमा करते हैं। शिवरात्रि के दिन इन temples में हजारों की संख्या में लोग भगवान Shiv की पूजा अर्चना करते हैं।

Baleshwar Temple के दर्शन से मिलता हैं चारों Dham का फल:

Champawat City के बीचों-बीच बने Baleshwar Shiv Temple की पूजा अर्चना करने से चारों Dham का फल मिलता है। Temple में सुबह ही Shivling का पूजन किया जाता है। Shiv को White Flower और धतूरा चढ़ाया जाता है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक यह Kailash Mansarovar यात्रा का Path भी रहा है। शिखरनुमा Temple के ठीक नीचे भगवान Shiv का लिंग स्थापित है। कहा जाता है कि वानर राज बाली ने वरद नामक शिवलिंग की स्थापना कर यहां शिवधाम का स्वरूप दिया था। द्वापर में महाभारत युद्ध के दौरान भीम ने इस temple का जीर्णोद्धार किया था।

चंद वंश के राजाओं का प्रतीक है Shiv का Nagnath Temple:

कहा जाता है कि राजबुंगा Fort के Near स्थापित Baleshwar temple चंद राजा रतन चंद के Son कीर्ति चंद ने बनाया था। मान्यता है कि नेपाल के राजा ने जब कीर्ति चंद पर आक्रमण किया था तो एक सन्यांसी Baba Nagnath ने कीर्ति चंद को जीत का उपाय बताया था। War जीतने के बाद राजा कीर्ति चंद Baba Nagnath के भक्त बन गए। Baba Nagnath की मृत्यु के बाद Fort के Near उन्होंने Baba Nagnath की समाधि बनाकर Shiv Temple की स्थापना की।

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